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ड्रग्स का जिंदगी और समाज पर ऐसा असर

आज हम मानव संसाधन की बात करें तो यह पूरे विश्व में झंडे फहराने में आगे है ऐसे में नशे की तरफ जब ध्यान जाता है तो मानो ऐसा लगता है जैसे नशे के काले कारोबारी उसकी नसों में नीला जहर उड़ेल रहे हैं और हम सब या तो इससे अनभिज्ञ होने का आडंबर कर रहे हैं ऐसे में आज भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में यह एक भयावह समस्या है जो मानव की जिंदगी और मानव समाज लोगों को बर्बाद करने में लगा है

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बीमारियों, हिंसा, अपराध, खून-खराबे आदि की बढ़ोतरी में योगदान करने वाली इस समस्या की अगर आर्थिक और सामाजिक कीमत आंकी जाए तो अरबों, खरबों में है।क्या आप और हम कभी रुक कर यह सोचते हैं की ड्रग्स का यह कहर मानव के शरीर के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक विडंबना को बहुत तेजी से फैला रहा है नशाखोरी से जुड़ी समस्याओं के चलते हर साल आत्महत्या करने वाले लोगों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।

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आंकड़ों की दृष्टि से देखा जाए कुछ इस तरह परिणाम सामने देखने को मिलेंगे
पदार्थ -- 2013 -- 2014 -- 2015 -- 2016 -- 2017*
अफीम -- 42 -- 25 -- 53 -- 263 -- 30
कोकीन -- 12 -- 23 -- 14 -- 44 -- 28
इफेड्रिन -- 1244 -- 2207 -- 7208 -- 4393 -- 1862
मैनड्रेक्स -- 5 -- 20 -- 72 -- 216 -- 274
गांजा -- 208764 -- 173128 -- 122711 -- 77149 -- 45000
चरस (हशीश) -- 3549 -- 4300 -- 3872 -- 3338 -- 2000
हेरोइन -- 1047 -- 766 -- 528 -- 1028 -- 863

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इस आंकड़े को देख कर ऐसा अंदाजा लगाया जा सकता है दिन प्रतिदिन नशे की तादाद बढ़ती ही जा रही है ऐसे में मानव शरीर के साथ-साथ मानव समाज भी खतरे में आता जा रहा है हमें इसके लिए जागरुक होने की आवश्यकता है और इस नशे को दर प्रति दर कम करने की आवश्यकता है

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